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‘Personal Loan’ Useful or Tension for future

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Personal loans can be useful for many things. People use them to spread the cost of their wedding, an adoption, tuition fees or to consolidate their existing debt. But how do you know whether it’s a good idea to take one out? There can be both pros and cons to personal loans, and it’s essential to think them over carefully before you commit yourself to one. Whether you already have debt or not, you need to reflect on whether you’ll be able to pay the loan back. You’ll need to make a choice between a secured and unsecured loan, and there are some things you should watch out for so you don’t get stung by unexpected fees.

1.Secured or Unsecured Loan:- Many people take out an unsecured loan, which depends on you having a healthy credit score. A secured loan, on the other hand, requires you to own property or another asset to back it. A secured loan can be riskier, but typically has lower interest rates, so you need to consider the details. If you have something you can use for a secured loan, it may be an option. But you should only use it if you’re certain you can make the repayments. If not, you could lose your asset, whether it’s property, your car or something else.

2. Can You Pay It Back:- Being able to pay back your loan is crucial. If you decide you need to borrow some money, you need to find the best, most affordable option. Before taking out a personal loan, it’s best to pay off as much of your credit card debt as you can. Look around for the best interest rates, and read the fine print about any changes. You might also consider getting payment protection insurance. Although you may associate it with nuisance callers, it can be useful if you’re worried you might miss a payment because of illness or unemployment. Interestingly, the average credit card interest rate can be far lower than that of taking out a loan – do you might wish to explore such options as an alternative to gaining quick access to additional finances.

3. Fees to Watch For:- When you apply for a personal loan, be careful of any fees in the fine print that you might miss. For example, most loans will charge for early repayment. If you pay off your loan earlier than expected, your lender won’t make the money they thought they would. So they’ll charge extra to make sure they still benefit. You also need to watch out for accidentally causing your bank account to go into overdraft. If there’s a possibility of this happening, don’t use automatic payments, to avoid overdraft fees.

4. Are Other Forms of Credit an Alternative:- Before you take out a personal loan, don’t forget to consider other forms of credit. For example, a credit card could be a better option for you. You could also try peer-to-peer lending, or even borrowing money from family or friends.

Make sure you think about it carefully before making the decision to take out a personal loan. They can be useful for a range of things, but don’t rush into taking one out.

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जगदलपुर से “भंजदेव” का लड़ना लगभग तय

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कमल चंद्र भंजदेव

सूत्रों से मिली ख़बर के अनुसार !!
बस्तर महाराज व छत्तीसगढ़ राज्य युवा आयोग के अध्यक्ष कमल चंद्र भंजदेव का बस्तर जिला मुख्यालय के एकमात्र सामान्य सीट जगदलपुर से आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी के रूप में उतरना लगभग तय हो चुका है. जगदलपुर से श्री भंजदेव को लड़ाकर भाजपा पूरे बस्तर संभाग को साधने के फिराक में है. भाजपा रणनीतिकारों की योजना श्री भंजदेव के प्रति आदिवासियों की आस्था को वोट में तब्दील करवाकर बस्तर संभाग के पूरे 12 विधानसभा सीटों में अधिकाधिक लीड बनाकर लगातार चौथी बार भाजपा सरकार बनाने की है. बस्तर सहित कांकेर क्षेत्र में भी उच्च शिक्षित युवा नेता श्री भंजदेव का स्टार प्रचारक के रूप में उपयोग पार्टी नेतृत्व करने जा रही है. पार्टी के अंदरूनी सूत्रों से खबर आ रही है कि जगदलपुर से श्री भंजदेव की उम्मीद्वारी के बहाने भाजपा की नजर बस्तर रियासत के प्रभाव वाले 18 विधानसभा सीटों पर है, जहाँ श्री भंजदेव के प्रभाव का इस्तेमाल कर स्थितियाँ पार्टी के अनुकूल बनाई जा सकती है. गौरतलब है कि भाजपा प्रवेश के बाद से ही श्री भंजदेव लगातार पार्टी को मजबूत करने में लगे हुए हैं. लगभग डेढ़ साल से चल रहे देवगुड़ी वंदन यात्रा के अभिनव पहल को मिल रही ऐतिहासिक सफलता और यात्रा के दौरान प्रत्येक जगह श्री भंजदेव के स्वागत व उन्हें सुनने उमड़ रही भीड़ से उनकी लोकप्रियता व जनता के बीच उनके प्रति आस्था का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है.

कमल चंद्र भंजदेव

कमल चंद्र भंजदेव

 

बस्तर की प्राचीन संस्कृति, सभ्यता व परंपराओं को बचाए रखने व उन्हें पुनर्जीवित करने के लिए सुदूर आदिवासी क्षेत्रों में जाकर वे जागरूकता अभियान भी चला रहे हैं. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की आत्मा ‘राष्ट्रीयता व सनातन संस्कृति की रक्षा’ के संकल्प को आगे बढ़ाते हुए श्री भंजदेव लगातार धर्मांतरण का विरोध करते हुए आदिवासियों के रोजगार व स्वालंबन हेतु प्रयासरत हैं. अंदरूनी सर्वे रिपोर्ट में भी कमल चंद्र भंजदेव जीतने योग्य मजबूत प्रत्याशी के रूप में पाए गए हैं, उनकी उम्मीद्वारी व नेतृत्व को बस्तर एक नई उम्मीद के रूप में देख रहा है.

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ओपी के जुड़ने से खरसिया में भाजपा हुई मजबूत

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रायगढ़ जिले के खरसिया के छोटे से गांव बयांग के किसान परिवार में जन्मे ओपी चौधरी ने कक्षा 1ली से 5वी तक की पढ़ाई शासकीय प्राथमिक शाला बयांग, कक्षा 6वीं से 8वीं तक की पढ़ाई शासकीय मिडिल स्कूल जैमूरा और 9वीं से 12वीं तक की पढ़ाई शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय नंदेली से पूरी की। अपने संघर्ष से वह छत्तीसगढ़ के पहले IAS बने और अपने गांव की माटी को गौरवान्वित किया।
ओपी जैसे पट छत्तीसगढ़िया के राजनीति में आने को एक क्रांति के रूप में देखा जा रहा है। भाजपा पर जो सेठिया राजनीति का आरोप लगता रहा है, ओपी उसका काट साबित होंगे। ओपी के रुप में भाजपा ने खरसिया विधानसभा के महान भाग्य की रुपरेखा तैयार कर ली है। जब ओपी का उदय होगा तो भाजपा की सत्ता का केंद्र एक छोटा सा गाँव होगा।

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रायपुर कलेक्टर ओपी चौधरी का इस्तीफा मंजूर!

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ओपी चौधरी

भारत सरकार ने रायपुर कलेक्टर ओपी चौधरी का इस्तीफा मंजूर कर लिया है। पता चला है, प्रधानमंत्री सचिवालय ने कल देर शाम इस्तीफे की स्वीकृति पर मुहर लगा दी।
ज्ञातव्य है, 16 अगस्त को अपना इस्तीफा मुख्य सचिव अजय सिंह को सौंप दिया था। सीएम की अनुशंसा के बाद 17 अगस्त को उन्होंने केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय को ओपी का इस्तीफा भेज दिया था।

ओपी चौधरी

ओपी चौधरी

ओपी 2005 बैच के आईएएस थे। वे रायगढ़ के बायंग गांव के रहने वाले हैं। खरसिया से उन्हें कांग्रेस के उमेश पटेल के खिलाफ विधानसभा चुनाव में उतारने की भाजपा की योजना है। जब वह दंतेवाड़ा के कलेक्टर थे तो उन्होंने अपने कार्यकाल में दंतेवाड़ा को एजुकेशन सिटी के तौर पर पहचान दिलाई | उन्हें पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में बेहतरीन काम के लिए प्राइम मिनिस्टर अवॉर्ड भी मिल चुका है | इसके अलावा वह रायपुर में नालंदा परिसर तैयार करवा चुके हैं | ये राज्य का पहला लर्निंग सेंटर है, जो 24 घंटे चलता है |
8 साल की उम्र में चौधरी के पिता का निधन हो गया था। ऐसे में मां ने मेहनत करके उन्हें पढ़ाया। इसी वजह से 12वीं में ही उन्होंने आईएएस बनने का फैसला ले लिया था। पीईटी में चयन होने के बावजूद उसे छोड़ दिया क्योंकि वह खुद को जिलाधिकारी के तौर पर ही देखना चाहते थे। 23 साल की उम्र में आईएएस अधिकारी बनने और इतनी बड़ी सफलता के बावजूद वो हमेशा अपनी जमीन से जुड़े रहते हैं। इस संबंध में जब उनसे पूछा गया था तो उन्होंने कहा, ‘जैसे ही आप बड़े ओहदे पर आते हैं, आपकी जिम्मेदारी बढ़ जाती है। ऐसे में आपकी परवरिश और संस्कार ही आपको जमीनी हकीकत से जोड़े रखती है। आज जमीनी हकीकत के जितने नजदीक होते हैं, उतने ही उसपर खरे उतरते हैं।’

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