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A tour to the heritage place ‘Bastar’

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Khabaribabu

Bastar is one of the historical places in central India. This district is located in the Chhattisgarh state and famous as a “Best tourist place” in Chhattisgarh.

Bastar is Famous for various cultural festivals, natural sightseeing, and other adventures. Bastar is famous for many natural sights, But there are some famous spots or cultural festival, which everyone wants to visit or see at least ones in a lifetime.
Here are some famous attractions of Bastar;

(1) Traditional Dussera festival:-

Bastar is one of the best places to visit during “Dusshera festival”, This is one of the longest festivals in the world and in India which runs for 75 days. It also showcases the different and interesting tribal customs.

 

(2) Chitrakote waterfall-

Chitrakot Waterfall

Chitrakot Waterfall

 

Chitrakote is a natural waterfall located at the west of Jagdalpur, in Bastar district. The height of the waterfall
is 29 meters (95 feet). The specialty of this waterfall is that this is one of the broadest waterfalls of INDIA.
The water-vapor surrounding the fall, everything leaves you just mesmerizing.

 

(3) Bastar palace:-

Bastar Palace

Bastar Palace

 

Bastar palace is one of the historical remains in the Bastar district. Bastar Palace was constructed by the kings of the Bastar.
Bastar palace was the headquarters of the Bastar’s kingdom.
At present this is the treasured monument open for the visitors and tourists by the government.

(4) Tirathgarh falls:-

 

This is a block waterfall, which flows through several layers of blocks from a height of approximately 300 feet.
There is a pool at the bottom of the waterfall, where we can enjoy a fine dip in the water.

 

(5) Goddes Danteshwari temple:-

Danteshwari temple is one of among the 52 Shaktipeethas, where goddess worships an idol of shakti.
This temple is situated in the heart of Bastar and the middle of “Dandakaranya” forest.

 

(6) Bastar Beer:-

Sulfi

Sulfi

” Money may not come from a tree but look beer does”. The tribes of Chhattisgarh have opened a new business by extracting a beer from the tree which they referred as “Sulfi”.

 

(7) Arts and culture:-

 

In Kondagaon area of the Bastar handcraft are mostly done. Many hand art such as vessels, jewelry, and local handicrafts are mostly made.

 

(8) Tribes:-

 

Bastar is one of the most eco-friendly places in the country. Bastar is one of the biggest tribal districts in the Chhattisgarh, famous for its green forests & tribes. Some of the tribes are Gond, Bhatra, Muria, Abhuj Maria, Bison Horn Maria, Halbaa, and Dhurvaa.
The tribes of Chhattisgarh make 26% of the population of Chhattisgarh.

 

 

 

How to reach there:-

If you are planning to commence a trip to Bastar, Raipur is one of the convenient places from where you can easily reach there and explore Bastar. Various Travellers taking the air route for reaching Bastar have to target the only airport in the state located at Raipur.
You can also reach Bastar by the bus services, and for this Raipur is one of the best option, which is around 300 km.

 

The heritage tour by ALPHAPRENUER-

Alphapreneur

Alphapreneur

 

Here is one of the biggest heritage tour called “THE HERITAGE TOUR-TRIP TO BASTAR” organized by the Alphapreneur and powered by TEDx. It is providing an excellent trip package for the people who like to know about nature, wildlife, Trekking, and many other different adventures. They will cover the famous Goncha festival of Bastar, Narayanpur, Tamdaghumar waterfall, Anthropology Museum, Madum Hatt, Chitrakote waterfall, Trithgarh Waterfall, Kondagaon.  This exploration package is of 3 days/4 nights at only 5999 Rs per person, with a great discount on group bookings. The Trip will start on 12th July 2018 from Raipur.

 

So, without worrying further how to reach Bastar, what it’s famous for and etc. just pack your bags and Join the ‘ TRIP TO BASTAR’ BY ALPHAPRENEUR at your earliest.

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जगदलपुर से “भंजदेव” का लड़ना लगभग तय

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कमल चंद्र भंजदेव

सूत्रों से मिली ख़बर के अनुसार !!
बस्तर महाराज व छत्तीसगढ़ राज्य युवा आयोग के अध्यक्ष कमल चंद्र भंजदेव का बस्तर जिला मुख्यालय के एकमात्र सामान्य सीट जगदलपुर से आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी के रूप में उतरना लगभग तय हो चुका है. जगदलपुर से श्री भंजदेव को लड़ाकर भाजपा पूरे बस्तर संभाग को साधने के फिराक में है. भाजपा रणनीतिकारों की योजना श्री भंजदेव के प्रति आदिवासियों की आस्था को वोट में तब्दील करवाकर बस्तर संभाग के पूरे 12 विधानसभा सीटों में अधिकाधिक लीड बनाकर लगातार चौथी बार भाजपा सरकार बनाने की है. बस्तर सहित कांकेर क्षेत्र में भी उच्च शिक्षित युवा नेता श्री भंजदेव का स्टार प्रचारक के रूप में उपयोग पार्टी नेतृत्व करने जा रही है. पार्टी के अंदरूनी सूत्रों से खबर आ रही है कि जगदलपुर से श्री भंजदेव की उम्मीद्वारी के बहाने भाजपा की नजर बस्तर रियासत के प्रभाव वाले 18 विधानसभा सीटों पर है, जहाँ श्री भंजदेव के प्रभाव का इस्तेमाल कर स्थितियाँ पार्टी के अनुकूल बनाई जा सकती है. गौरतलब है कि भाजपा प्रवेश के बाद से ही श्री भंजदेव लगातार पार्टी को मजबूत करने में लगे हुए हैं. लगभग डेढ़ साल से चल रहे देवगुड़ी वंदन यात्रा के अभिनव पहल को मिल रही ऐतिहासिक सफलता और यात्रा के दौरान प्रत्येक जगह श्री भंजदेव के स्वागत व उन्हें सुनने उमड़ रही भीड़ से उनकी लोकप्रियता व जनता के बीच उनके प्रति आस्था का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है.

कमल चंद्र भंजदेव

कमल चंद्र भंजदेव

 

बस्तर की प्राचीन संस्कृति, सभ्यता व परंपराओं को बचाए रखने व उन्हें पुनर्जीवित करने के लिए सुदूर आदिवासी क्षेत्रों में जाकर वे जागरूकता अभियान भी चला रहे हैं. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की आत्मा ‘राष्ट्रीयता व सनातन संस्कृति की रक्षा’ के संकल्प को आगे बढ़ाते हुए श्री भंजदेव लगातार धर्मांतरण का विरोध करते हुए आदिवासियों के रोजगार व स्वालंबन हेतु प्रयासरत हैं. अंदरूनी सर्वे रिपोर्ट में भी कमल चंद्र भंजदेव जीतने योग्य मजबूत प्रत्याशी के रूप में पाए गए हैं, उनकी उम्मीद्वारी व नेतृत्व को बस्तर एक नई उम्मीद के रूप में देख रहा है.

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ओपी के जुड़ने से खरसिया में भाजपा हुई मजबूत

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रायगढ़ जिले के खरसिया के छोटे से गांव बयांग के किसान परिवार में जन्मे ओपी चौधरी ने कक्षा 1ली से 5वी तक की पढ़ाई शासकीय प्राथमिक शाला बयांग, कक्षा 6वीं से 8वीं तक की पढ़ाई शासकीय मिडिल स्कूल जैमूरा और 9वीं से 12वीं तक की पढ़ाई शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय नंदेली से पूरी की। अपने संघर्ष से वह छत्तीसगढ़ के पहले IAS बने और अपने गांव की माटी को गौरवान्वित किया।
ओपी जैसे पट छत्तीसगढ़िया के राजनीति में आने को एक क्रांति के रूप में देखा जा रहा है। भाजपा पर जो सेठिया राजनीति का आरोप लगता रहा है, ओपी उसका काट साबित होंगे। ओपी के रुप में भाजपा ने खरसिया विधानसभा के महान भाग्य की रुपरेखा तैयार कर ली है। जब ओपी का उदय होगा तो भाजपा की सत्ता का केंद्र एक छोटा सा गाँव होगा।

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रायपुर कलेक्टर ओपी चौधरी का इस्तीफा मंजूर!

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ओपी चौधरी

भारत सरकार ने रायपुर कलेक्टर ओपी चौधरी का इस्तीफा मंजूर कर लिया है। पता चला है, प्रधानमंत्री सचिवालय ने कल देर शाम इस्तीफे की स्वीकृति पर मुहर लगा दी।
ज्ञातव्य है, 16 अगस्त को अपना इस्तीफा मुख्य सचिव अजय सिंह को सौंप दिया था। सीएम की अनुशंसा के बाद 17 अगस्त को उन्होंने केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय को ओपी का इस्तीफा भेज दिया था।

ओपी चौधरी

ओपी चौधरी

ओपी 2005 बैच के आईएएस थे। वे रायगढ़ के बायंग गांव के रहने वाले हैं। खरसिया से उन्हें कांग्रेस के उमेश पटेल के खिलाफ विधानसभा चुनाव में उतारने की भाजपा की योजना है। जब वह दंतेवाड़ा के कलेक्टर थे तो उन्होंने अपने कार्यकाल में दंतेवाड़ा को एजुकेशन सिटी के तौर पर पहचान दिलाई | उन्हें पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में बेहतरीन काम के लिए प्राइम मिनिस्टर अवॉर्ड भी मिल चुका है | इसके अलावा वह रायपुर में नालंदा परिसर तैयार करवा चुके हैं | ये राज्य का पहला लर्निंग सेंटर है, जो 24 घंटे चलता है |
8 साल की उम्र में चौधरी के पिता का निधन हो गया था। ऐसे में मां ने मेहनत करके उन्हें पढ़ाया। इसी वजह से 12वीं में ही उन्होंने आईएएस बनने का फैसला ले लिया था। पीईटी में चयन होने के बावजूद उसे छोड़ दिया क्योंकि वह खुद को जिलाधिकारी के तौर पर ही देखना चाहते थे। 23 साल की उम्र में आईएएस अधिकारी बनने और इतनी बड़ी सफलता के बावजूद वो हमेशा अपनी जमीन से जुड़े रहते हैं। इस संबंध में जब उनसे पूछा गया था तो उन्होंने कहा, ‘जैसे ही आप बड़े ओहदे पर आते हैं, आपकी जिम्मेदारी बढ़ जाती है। ऐसे में आपकी परवरिश और संस्कार ही आपको जमीनी हकीकत से जोड़े रखती है। आज जमीनी हकीकत के जितने नजदीक होते हैं, उतने ही उसपर खरे उतरते हैं।’

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